AI के इस्तेमाल से बने डिवाइस से होगी मरीजों की रियल टाइम मॉनिटरिंग, डॉक्टर को बीमारी के बारे में तुरंत मिलेगा अलर्ट

ETV Bharat

March 26, 2026
AI-Powered Health Monitoring Device

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधुनिक हेल्थकेयर को फिर से परिभाषित कर रहा है, जिससे फोकस बीमारी के इलाज से हटकर उसकी भविष्यवाणी और रोकथाम में मदद मिलने की पूरी उम्मीद है. इसी क्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से एक मेडिकल डिवाइस बनाया गया है जिसको आई लिव कनेक्ट नाम दिया गया है.

कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉक्टर विवेका कुमार ने इसके बारे में बताया कि यह डिवाइस अपनी तरह का दुनिया का पहला, डॉक्टर-नेतृत्व वाला एआई हेल्थकेयर इकोसिस्टम है, जिसकी मदद से अस्पताल के बाहर भी रियल-टाइम मेडिकल सुपरविजन देने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसमें डॉक्टर से सलाह लेने, गंभीर स्थिति में एंबुलेंस अलर्ट भेजने का भी विकल्प दिया गया है.

इस तरह काम करता है डिवाइस

डॉक्टर विवेका कुमार ने बताया कि इस डिवाइस के साथ एक छोटा वायरलेस बायोसेंसर पैच है, जो एक पहनने योग्य रिस्टबैंड के साथ जुड़ा होता है, जो लगातार जरूरी शारीरिक मापदंडों को कैप्चर करता है. इनमें टू-लीड ईसीजी, हार्ट रेट, श्वसन दर, ऑक्सीजन सैचुरेशन (SpO₂), शरीर का तापमान, ब्लड प्रेशर के रुझान, शारीरिक गतिविधि और हार्ट रेट में आने वाले उतार चढ़ाव शामिल हैं. इस डिवाइस के द्वारा डेटा वायरलेस तरीके से एक सुरक्षित क्लाउड-आधारित प्लेटफॉर्म पर भेजा जाता है और आगे एक समर्पित मेडिकल कमांड सेंटर को रिले किया जाता है.

एआई के इस्तेमाल से बने डिवाइस से होगी मरीजों की रियल टाइम मॉनिटरिंग (ETV Bharat)

डॉक्टर विवेका ने बताया कि कमांड सेंटर में चौबीसों घंटे एक्सपर्ट डॉक्टर तैनात रहते हैं जो मरीज़ों की रियल टाइम में सक्रिय रूप से निगरानी करते हैं और किसी भी शारीरिक समस्या के बढ़ने का संकेत मिलते ही कमांड सेंटर को अलर्ट का मैसेज भेज देते हैं. इस डिवाइस में एआई-संचालित प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स शामिल है, जो सूक्ष्म शारीरिक परिवर्तनों का पता लगाने में सक्षम बनाता है, जो क्लिनिकल लक्षण विकसित होने से पहले बीमारी की शुरुआत का संकेत दे सकते हैं.

410 मरीजों पर 10 सप्ताह तक की गई स्टडी में हॉस्पिटलिजेशन में आई 76% की कमी

हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर राहुल चंदोला ने डिवाइस के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह डिवाइस स्वास्थ्य समस्या जैसे बीपी बढ़ना या कम होना, पल्स रेट, हार्ट बीट, शुगर लेवल सहित सात चीजों को मॉनिटर करता है. इससे शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं की जटिलताओं में काफी कमी आती है, मेडिकल इमरजेंसी से बचा जा सकता है. इससे बार-बार हॉस्पिटलाइजेशन की आवश्यकता कम हो जाती है.

कार्डियोवैस्कुलर और थोरेसिक सर्जन के अनुसार डॉ. राहुल चंदोला के अनुसार, यह सिस्टम हेल्थकेयर में सबसे बड़े अंतरों में से एक को दूर करने के लिए विकसित किया गया है. इसको तैयार करने में दो साल से ज्यादा का समय लगा. एक बार जब मरीज अस्पताल से घर चला जाता है तो लगातार मेडिकल सुपरविजन की कमी, अधिकांश गंभीर मेडिकल घटनाएं अस्पतालों के अंदर नहीं होती हैं, बल्कि उस अवधि के दौरान होती हैं जब मरीज बिना मेडिकल निगरानी के घर पर होते हैं. लगातार बायोसेंसर मॉनिटरिंग को प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और सक्रिय डॉक्टर सुपरविजन के साथ मिलाकर यह डिवाइस लक्षणों के प्रकट होने से बहुत पहले शारीरिक गिरावट का पता लगाने में सक्षम बनाता है. यह समय पर मेडिकल मार्गदर्शन की अनुमति देता है और गंभीर बीमारी बढ़ने से रोकता है.

डॉ. चंदोला ने कहा 10-सप्ताह के ऑब्जर्वेशनल अध्ययन के दौरान 410 से अधिक मरीज़ों के डेटा के एक अध्ययन में, बार-बार हॉस्पिटलाइज़ेशन में 76% की कमी आई, जिसमें हृदय संबंधी स्थितियों, ब्लड प्रेशर अस्थिरता, मेटाबोलिक विकारों और डिस्चार्ज के बाद की जटिलताओं से संबंधित जोखिमों की जल्दी पहचान हुई. इस टेक्नोलॉजी से अकेले रहने वाले सीनियर सिटिजन्स, पुरानी बीमारियों वाले मरीज़ों और हाल ही में हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुए लोगों को खास फायदा हुआ है, जिनके लिए हॉस्पिटल की देखभाल से घर पर आने का समय काफी नाज़ुक होता है.

इस डिवाइस के इस्तेमाल से हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक जैसी त्वरित इलाज वाली घटनाओं में लाई जा सकती है कमी

सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विवेका कुमार ने बताया कि एआई को लगातार क्लिनिकल निगरानी के साथ जोड़ने से कई संभावित गंभीर स्थितियों में तेज़ी से रिस्पॉन्स टाइम और समय पर मेडिकल मदद मिल पाई है. उन्होंने बताया कि इसके उपयोग से हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर और त्वरित इलाज वाली बीमारियों में कमी लाई जा सकती है. उन्होंने बताया कि पारंपरिक पहनने वाले डिवाइस जो सिर्फ़ यूज़र्स को हेल्थ डेटा दिखाते हैं, जबकि यह डिवाइस एक डॉक्टर की मॉनिटरिंग वाला लगातार देखभाल वाला इकोसिस्टम है, जहां टेक्नोलॉजी क्लिनिकल फैसले लेने में मदद करती है, न कि उसकी जगह लेती है.

डॉ. विवेका ने बताया कि यह प्लेटफ़ॉर्म जगह की परवाह किए बिना स्पेशलिस्ट की निगरानी तक पहुंच देता है, जिससे देश के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले मरीज़ों को बार-बार हॉस्पिटल जाए बिना एडवांस्ड मेडिकल मॉनिटरिंग मिल पाती है. बढ़ती लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के दौर में समय-समय पर हेल्थकेयर से हटकर लगातार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए डॉक्टरों को मरीज़ों के करीब लाता है और आधुनिक हेल्थकेयर में मरीज़ों की सुरक्षा को बढ़ाता है.

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