दुनिया का पहला AI कंटीन्यूअस हेल्थकेयर इकोसिस्टम भारत में लॉन्च, हेल्थ मॉनिटर करना होगा आसान

<h4 class="font-semibold text-primary-500">TV9 Bharatvarsh</h4> March 25, 2026 1 min read
Ilive Connect AI System

दुनिया का पहला AI कंटीन्यूअस हेल्थकेयर इकोसिस्टम भारत में लॉन्च, हेल्थ मॉनिटर करना होगा आसान

भारत ने पहला डॉक्टर-नेतृत्व वाला AI कंटीन्यूअस हेल्थकेयर इकोसिस्टम लॉन्च किया है. iLive Connect के केंद्र में एक छोटा वायरलेस बायोसेन्सर पैच है जो एक पहनने योग्य रिस्टबैंड के साथ जुड़ा होता है, जो लगातार ज़रूरी शारीरिक मापदंडों को कैप्चर करता है. इसका मकसद अस्पताल से दूर आपके हेल्थ को मॉनिटर करना है.

आम तौर पर यदि आप घर से दूर हों और घर की किसी भी गतिविधि पर नजर रखनी हो तो आप सीसीटीवी लगवाते हैं जिससे कि लाइव अपडेट रख सकें. क्या आपने सोचा है कि ऐसा आपके स्वास्थ्य को लेकर भी संभव है. भारत ने दुनिया का पहला डॉक्टर के नेतृत्व वाला AI कंटीन्यूअस हेल्थकेयर इकोसिस्टम लॉन्च किया है. इसका मकसद अस्पताल से दूर आपके हेल्थ को मॉनिटर करना है.

टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में इस डिवाइस के बनाने वाले कार्डियोसर्जन डॉ राहुल चंदोला ने बाताया कि इस तरह के डिवाइस से प्रेडिक्टिव मॉनिटरिंग के जरिए बीमारी का जल्दी पता लगाने और हॉस्पिटलाइज़ेशन में काफ़ी कमी लाने में काफी मददगार है.

एफडीए (Food and Drug Administration) स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के अंतर्गत एक अमेरिकी संघीय एजेंसी के रूप में, यह दवाओं, जैविक उत्पादों, चिकित्सा उपकरणों, खाद्य पदार्थों और सौंदर्य प्रसाधनों की सुरक्षा, प्रभावकारिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करके जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उत्तरदायी संस्था से भी एप्रूवल मिल गया है.

क्या है यह डिवाइस

वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ विवेका कुमार ने टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में बताया कि अपनी तरह का दुनिया का पहला डॉक्टर के नेतृत्व वाला AI हेल्थकेयर इकोसिस्टम है, जिसे अस्पताल की दीवारों के बाहर भी रियल-टाइम मेडिकल सुपरविज़न देने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

iLive Connect के केंद्र में एक छोटा वायरलेस बायोसेन्सर पैच है जो एक पहनने योग्य रिस्टबैंड के साथ जुड़ा होता है, जो लगातार ज़रूरी शारीरिक मापदंडों को कैप्चर करता है. इनमें टू-लीड ECG, हृदय गति, श्वसन दर, ऑक्सीजन सैचुरेशन (SpO2), शरीर का तापमान, ब्लड प्रेशर के रुझान, शारीरिक गतिविधि और हृदय गति परिवर्तनशीलता शामिल हैं. डेटा वायरलेस तरीके से एक सुरक्षित क्लाउड-आधारित प्लेटफॉर्म पर भेजा जाता है और फिर एक डेडिकेटेड मेडिकल कमांड सेंटर को भेजा जाता है.

24 घंटे रहती है मरीज पर नजर

डॉ राहुल ने कहा कि कमांड सेंटर में चौबीसों घंटे अत्यधिक विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात रहते हैं जो मरीज़ों की रियल टाइम में सक्रिय रूप से निगरानी करते हैं. पारंपरिक मॉनिटरिंग सिस्टम के विपरीत जो केवल लक्षण दिखने के बाद प्रतिक्रिया करते हैं, इसमें AI-संचालित प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स शामिल है, जो सूक्ष्म शारीरिक परिवर्तनों का पता लगाने में सक्षम बनाता है जो क्लिनिकल लक्षण विकसित होने से बहुत पहले बीमारी की शुरुआत का संकेत दे सकते हैं.

मेडिकल इमरजेंसी से बचाव

डॉ विवेका ने कहा कि जिस तरह से डेटा कमांड सेंटर में आता है उसके आधार पर निर्णय लिया जाता है. उन्होंने बताया कि यदि किसी को नींद नहीं आती है और उसे एक नियत अवधी तक नींद की जरुरत है. ऐसे में यह डिवाइस यह भी बताता है कि अमुक दिन में उसकी नींद में इतने घंटों की कमी रही है. इस तरह के छोटे से छोटे स्वास्थ्य संबंधी आंक़ड़ों के अध्ययन से किसी भी मेडिकल इमरजेंसी से बचा जा सकता है. जिससे की बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता कम हो जाती है.

किन मरीजों को अधिक जरुरत

डॉ राहुल चंदोला ने कहा कि जब कोई मरीज़ अस्पताल से घर जाता है तो लगातार मेडिकल सुपरविज़न की जरुरत होती है. ऐसे में किसी भी तरह के पहले शारीरिक गिरावट का पता लगाने में यह डिवाइस सक्षम है। यह समय पर मेडिकल मार्गदर्शन की अनुमति देता है और गंभीर बीमारी में बदलने से रोकता है.

क्या कहते हैं आंकड़े

जानकारी के मुताबिक 10-सप्ताह के ऑब्ज़र्वेशनल अध्ययन के दौरान 410 से अधिक मरीज़ों के डेटा के एक अध्ययन में बार-बार अस्पताल में भर्ती होने में 76% की कमी देखी गई. जिसमें हृदय संबंधी स्थितियों, ब्लड प्रेशर अस्थिरता, मेटाबॉलिक विकारों और डिस्चार्ज के बाद की जटिलताओं से संबंधित जोखिमों की जल्दी पहचान की गई. इस टेक्नोलॉजी से अकेले रहने वाले सीनियर सिटिजन्स, पुरानी बीमारियों वाले मरीज़ों और हाल ही में हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुए लोगों को खास फायदा हुआ है, जिनके लिए हॉस्पिटल की देखभाल से घर पर आने का समय काफी नाज़ुक होता है.

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